Sahaja Yoga
- सहजयोग ध्यान करने से मेरी सारी बिमारियॉं चली गई|

- दुनिया में इस समय हर व्यक्ति किसी न किसी वजह से परेशान नजर आता है| सबकी समस्याएं अलग-अलग होती हैं| कोई बीमारी की वजह से, कोई घर के माहौल की वजह से, कोई बिजनेस की वजह से तो कोई कई वजहों से परेशानी में है|यदि आप इन सभी कठिनाइयों से बाहर निकलना चाहते हैं तो सहज योग में आना आवश्यक है| क्योंकि सहज योग में आने के बाद आपको किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा| क्योंकि सहज योग ध्यान की एक ऐसी पद्धति है , जिसमे हर समस्या का उत्तर परम पूजनीय श्री माताजी निर्मला देवीजी की परमकृपा से हमे मिल जाता है | वह व्यक्ति जो ईमानदारी से श्रीमाताजी के चरणों में समर्पित है , उसे कोई भी परेशानी हो ही नही सकती | सहजयोग हममें हर संकट का सामना करने की इच्छाशक्ति पैदा करता है , हमारा आत्मविश्वास दृढ़ करता है और हमे सही राह भी दिखाता है | सहजयोग में आने से स्वयं में दोषों को समझ सकते हैं और स्वयं को शुद्ध करने के लिए उन्हें दूर कर सकते हैं्| यह जान लेना कि तुम आत्मा हो, सत्य को जान लेना है, तब तुम सहज ही सब मिथ्याओं का त्याग कर देते हो| केवल जब आत्मा प्रकाश में आती है, तो आप जानते हैं कि क्या सच है और क्या झूठ है, जब तक कि आप संतोष-आनंद और झूठी चीजों के प्यार से भर नहीं जाते| आत्मा से मिलने की आपकी शुद्ध इच्छा के कारण ही आप उससे मिलते हैं्| इसलिए मेरी कुण्डलिनी को जाग्रत होने दो, केवल एक ही इच्छा को धारण करो | दुनिया भर के कई देशों में कई लोगों को यह अनुभव हुआ है| इस अनुभव से हमें अपने हृदय में सहज योग और श्री माताजी निर्मला देवी के प्रति स्थान का पता चलता है|


- श्री माताजी की कृपा से, सहज योग में आने से पहले मैं कई बीमारियों से पीड़ित था| आसपास कई अस्पताल आए. लेकिन इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा. फिर एक अद्भुत लहर आई और मुझे सहज योग में ले गई्| शुरुआत में सहजयोग करने पर कुछ खास महसूस नहीं हुआ्| लेकिन जिस तरह से मैं सहज योग में शामिल हुई, मुझे दिखने लगा कि सहज योग के कारण मेरे शरीर की एक बीमारी दूर हो रही है| जब से मैंने सहज योग करना शुरू किया, अब घर में हर कोई सहज योग कर रहा है|
- मैंने २०१३ में सहजयोग करना शुरू किया| पहले मैं घर में अकेली ही ध्यान करती थी और दोन तीन महिने ध्यान करने के बाद मेरा सारा परिवार सहजयोग में आ गया | ध्यान करने से पहले परिवार की स्थिती सही नही थी और मेरे शरीर में भी कई बिमारियॉं जैसे सिर में चक्कर आना, घुँटनो में दिक्कत थी मेडिटेशन करने के बाद वे दिक्कते अपने आप समाप्त हो गई |एक दिन मैने ‘श्री माताजी’ का शृंगार बिंन्दी में अपने आप (ॐ) बन गया उसी दिन से मेरा विश्वास और अधिक बढ गया |
- धिरे धिरे मेरे घर परिवार की स्थिती भी बहुत अच्छी हो गई | मैने सोचा जैसे ’श्री माताजी’ने सभी प्रकार की खुशियॉं मुझे दी | वैसे ही मेरे आस पास सगे संबंध को भी मैं मिली और सहजयोग प्रचार प्रसार करना शुरू किया | जो आनंद मुझे सहजयोग में मिला वो आनंद मुझे कही नहीं मिला था ‘‘ मैं श्री माताजी से प्रार्थना करती हूँ की मुझे हमेशा हमेशा के लिए अपने श्री चरणो से लगाए रखना |
- जय श्री माताजी
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